एक तारीख थी. पति अपनी नौकरी लेकर शाम को थका हुआ घर आया। पत्नी को इंतजार था कि पति कब आएंगे। पति के आते ही उसने अपनी गर्मागर्म चाय पिलाई और पूछा--
“आज नौकरी मिलेगी आपकी?”
पति सुन्दरता के साथ बोला —
“हां, और इस महीने ओवरटाइम का ₹12,000 का बोनस भी मिला है।”
पत्नी की ख़ुशी का ज़िक्र नहीं आ रहा। पत्नी मिठाई की बोली में -
“क्या हम इस रविवार को खरीदारी करेंगे?”
तो पति बोला--
"ठीक है, लेकिन सिर्फ एक शर्त पर। अगर तुम एक हफ्ते में कम से कम एक बार मेरी मां से फोन पर बात करो उनकी हाल पूछोगी।"
पत्नी ने दबी आवाज़ में "हाँ" कर दी। पति बस यही चाहती है कि उसकी मां और पत्नी के बीच जो भी अनबन है, वह दूर हो जाए।
ठीक है 2 मिनट बाद पति के मोबाइल पर मां का फोन आया। यहाँ से माँ बोली --
“कैसे हो बेटा?”
—
"मां, मैं ठीक हूं। क्या सब कुछ ठीक है?"
तो पत्नी के साथ मुँह बनाये मन ही मन सोच रही थी —
"आज पहली तारीख है, वेतन आया है, इसलिए फोन करके पैसे लेना चाहता है। लेकिन इस बार मैंने एक पैसा भी नहीं बताया।"
उधर मां बोली —
“बेटा, थोड़ी मदद करनी चाहिए।”
तो बेटा बोला--
“बोलिए माँ, क्या हुआ?”
मां बोली —
“बेटा, इस महीने ₹5000 मिल सकते हैं क्या?”
पति ने हर काम से अपनी पत्नी से पूछा था। उसने यह बात पत्नी से पूछी। पत्नी बोली -
“बोल दो कि अभी नौकरी नहीं है।”
बेटे ने माँ से कहा -
“माँ, अभी भी आने का समय है।”
मां बोली —
"बेटा, स्पेक्ट्रम दो कैसे कहें, कृपया। अस्पताल में इलाज के लिए कहें।"
पति ने कही ये बात पत्नी से डबल. पत्नी बोली -
"मां से बोल दो कि सरकारी अस्पताल में इलाज करवा लें।"
पति ने माँ को यही सलाह दी।
मां बोली —
"बेटा, सरकारी अस्पताल में सही इलाज नहीं होता और वहां ध्यान भी नहीं रहता। इस बार तो..."
पत्नी को गुस्सा आ गया और वह पति से बोली —
"बोल दो उन्हें कि हमारा सर पहले से इतना लोड है और अब इतना हम सह नहीं पाएंगे। इसलिए सरकारी अस्पताल में ही इलाज कराओ।"
पत्नी के ये शब्द बोले. यह बोली बोली -
“वैसे भी चार-पांच दिन के मेहमान हैं।”
पति इस बार बोला —
“ऐसे तो मत बोलो माँ के बारे में।”
पति को थोड़ा गुस्सा आ गया, लेकिन मन को शांत करते हुए मां से बोला-
"माँ, इस महीने कोई हत्या नहीं हो सकती। इसलिए सरकारी अस्पताल में करवा ही इलाज।"
माँ यहाँ से भीख मांगती रही —
“बेटा, प्लीज ₹2000 तो दे दो।”
तो पति की नजर में फूलों के लिए पत्नी से बोला -
“कम से कम ₹2000 तो दे दो।”
पत्नी की शादी हुई थी लेकिन जैसे-तैसे मन गया और बोली -
“ठीक है, बोल दो कि ₹2000 पेट्रोल ले आओगे कल।”
तो अन्य पति बोला--
"सासु माँ, पेट्रोल पंप ₹2000 का लगा।"
पति के मुंह से इस बार "मां" की जगह "सासु मां" का बयान ही पत्नी को चक्कर आने लगा। जाँघ लड़खड़ाने लगी, खाना छूट गया और पति से पूछा —
“क्या यह मेरी माँ का फ़ोन आया है?”
पति बोला —
"हां, मैं तो विवाह योग्य मां को अपनी मां की तरह ही नहीं छोड़ता। लेकिन मैं तो विवाह योग्य मां को अपनी मां की तरह ही नहीं छोड़ता।"
पत्नी ने इस बार ज़ोर से डाला और फ़ोन में तारा की महारानी बनीं —
“मुझे माफ़ कर दो माँ, मुझे बहुत बड़ी गलती हुई है।”
तो यहाँ से माँ बोली --
"बेटी, अगर सिर्फ एक माँ का दिल दुखाता है तो माफ़ कर देता है। लेकिन मैं तो आज एक नहीं बल्कि दो माँ का दिल दुखाता हूँ।"
अगर आज मैं समुद्री डाकू भी कर दूं, तो ऊपर वाला भी नहीं चाहता।
संदेश
तो दोस्तों ऐसा माना जाता है कि अगर ऊपर वाले ने भी मां का कर्ज चुकाया तो वह भी कंगाल हो जाएगा।
एक माँ की मौत के मुँह में जिज्ञासु जीवन का जन्म हुआ है। उस माँ का सम्मान
करें।
माँ तो माँ होती है, लेकिन मौत से पहले जीते-जी न रुलाते।

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