"पुरुष एक दिन में कमज़ोर नहीं बनता। वह हर दिन अपनी छोटी-छोटी बुरी आदतों से धीरे-धीरे अपनी ताकत खोता है... और जब उसे एहसास होता है, तब तक उसके सपने उससे बहुत दूर जा चुके होते हैं।"
"अगर एक आदमी अपने मन पर जीत नहीं पा सकता, तो दुनिया जीतने का सपना भी बेकार है।"
आज मुझे सबसे ज़्यादा डर किसी दुश्मन से नहीं लगता...
डर इस बात का लगता है कि हमारी पूरी पीढ़ी धीरे-धीरे **अंदर से कमज़ोर** होती जा रही है।
शरीर से नहीं... **इरादों से।**
आज बहुत से लड़कों का दिन मोबाइल से शुरू होता है और मोबाइल पर ही खत्म हो जाता है।
थोड़ी-सी परेशानी आई नहीं कि हिम्मत टूट जाती है।
थोड़ा-सा रिजेक्शन मिला नहीं कि आत्मविश्वास खत्म हो जाता है।
थोड़ा-सा अकेलापन मिला नहीं कि इंसान गलत आदतों का गुलाम बन जाता है।
फिर कहते हैं कि किस्मत खराब है...
नहीं।
**जिस दिन आदमी अपने मन का गुलाम बन जाता है, उसी दिन उसकी असली ताकत खत्म होने लगती है।**
मेरे लिए मर्दानगी का मतलब किसी पर हुकूमत करना नहीं है।
मर्दानगी का मतलब है—
जब कोई साथ न दे, तब भी अपने रास्ते पर चलते रहना।
जब मन हार मानने को कहे, तब भी खुद को उठाकर खड़ा कर देना।
अपने माँ-बाप का सहारा बनना।
अपने वादे की कीमत समझना।
और हर दिन कल से बेहतर इंसान बनने की कोशिश करना।
अगर सच में खुद को बदलना चाहते हो तो—
किताबों से दोस्ती करो।
रोज़ पसीना बहाओ।
पोर्न और नशे जैसी आदतों से दूरी बनाओ।
8 घंटे की नींद लो।
लड़कियों के पीछे नहीं, अपने सपनों के पीछे भागो।
और हर सुबह खुद से सिर्फ़ एक सवाल पूछो—
**"क्या आज का मैं, कल वाले मुझसे बेहतर है?"**
याद रखो...
**आराम इंसान को धीरे-धीरे खोखला कर देता है।
संघर्ष इंसान को ऐसा बनाता है कि एक दिन वही संघर्ष उसकी पहचान बन जाता है।**
अगर यह बात दिल तक पहुँची हो, तो इसे आगे ज़रूर बढ़ाना। शायद कोई लड़
का आज भी खुद को तलाश रहा हो।

Comments